Tuesday, 21 August 2018

संवेदनाओं के पंख / दिव्य-दृष्टि: कहानी - ग्रीटिंग कार्ड - हरीश कुमार

संवेदनाओं के पंख / दिव्य-दृष्टि: कहानी - ग्रीटिंग कार्ड - हरीश कुमार: कहानी का अंश... वो शायद कालेज के दिनों का पहला प्रेम रहा होगा शायद नहीं भी । पास से गुजरते हुए अपनी ही सहपाठिका का मुस्करा भर देना प्रेम ह...

gratitude is the real solution.