जिस के पास जो होता है वही चारों ओर बिखेरता है । फूल खुशबू और कांटा कुरूपता । दोनों एक दूसरे के पूरक है पर हम फूल का चुनाव करते है । यहीं हमारा चरित्र है । जीवन मे भी बस यही करना है,दुखों और मुसीबतों पर समय बर्बाद करने के बजाए केवल खुशियों को खोजने और फैलाने का चुनाव करें । स्पर्श,मुस्कुराहट,आलिंगन,हास्य,प्रेम,आशा,प्रशंसा और सकारात्मक प्रयत्न आपको हमेशा दुगने मिलते हैं जब आप ये दूसरों को देते हैं । हम फ़िल्म देखते है तो खलनायक से ज्यादा हमें नायक प्रभावित करता है क्योंकि हमारे भीतर भी एक छुपा नायक है जो जीतना चाहता है,लोकप्रिय होना चाहता है । वास्तविक जीवन मे भी क्या हम नायक बनने के लिए सभी सकारात्मक और अच्छे कामों में जुटने के लिए तैयार है । एक नायक के पास मेहनत,योजना,प्रेम,दूसरों की भलाई के लिए खुद को हमेशा तैयार रखना और उनकी मदद करने की ततपरता रहती है । यही गुण उसे हीरो या नायक बनाते है । वो मुश्किलों से घबराता नहीं बल्कि उनमे कोई न कोई हल ढूंढ लेता है । वो अपने क्रोध को,संयम को,प्रेम को ,सद्भाव को और सहयोग को सही समय और सही जगह पर प्रदर्शित करता है । हम सब ये कर सकते हैं बस हमें इसका अभ्यास करना पड़ता है । हमारे संस्कार हमारे बचपन की यादों और प्रभावों से जुड़े होते है ,कई बार ये ज्यादा अच्छे अनुभव नहीं ले पाते पर फिर भी बड़े होते समय हम समाज और स्कूल शिक्षा से अच्छे लोगों और अच्छे मित्रों के बीच रहकर बदल जाते हैं । हमे मित्रता,संयम ,प्रेम और सहयोग की सकारात्मक परिभाषा अपने अचार व्यवहार में लाने की सीख मिलती है । आप सोचिए कि आप खुद दूसरों से प्यार,सहयोग,हमदर्दी और प्रशंसा नही चाहते? बस यही दूसरे आपसे चाहते हैं । प्रकृति का यही नियम है जो हम देते हैं जो हम सोचते हैं वही हमारी आदत बन जाता है वही हमे मिलता है । और यकीन मानिए कि यदि आपके आस पास ये सब देने वाले लोग और मित्र है,परिवार है तो आप सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं ।
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