Monday, 11 June 2018

खुशी की कहानी

एक कहानी खुशी की
तेज गर्मी के कारण मन बोरियत से भरा था । ऊपर से छुट्टियां थी । लोग बाग पहाड़ो में,वादियों में घूमते अपनी सेल्फी सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे थे । उन्हें खुश देखकर थोड़ी जलन हुई पर फिर याद आया कि जहां हो जैसे हो उससे निराश न हो ,अपनी नियामतों के लिए सदा आभारी रहोगे तो सब अच्छा होगा । मैं घर के बागीचे में चला गया । बच्चे वहाँ लूडो खेल रहे थे । मुझे अपना बचपन याद आ गया । मैं उनके खेल में शामिल हो गया । अब मन खुश था । अचानक बादल घिर आये । धीमी बारिश शुरू हो गई । हवा रोमानी हो गयी । बारिश की गति बढ़ गयी । मैं बच्चों के साथ बारिश में नहाने लगा । ऐसा लगा जैसे पर्वतों की ताजगी और हरियाली चारों ओर फैल गयी हो । खूब नहाया,मस्ती की । बारिश भी जैसे नाचने के मूड में थी । सोचा कि जब छोटा था और ऐसी बारिश होती तो मां पकौड़े,मालपुए और खीर बनाया करती । सब जम के खाता । मन ही मन मैंने अपने भीतर उस स्वाद को महसूस किया । मन ही मन इस अनुभूति के लिए ईश्वर को कई बार धन्यवाद कहा । अचानक पत्नी की आवाज आई,
"बहुत मस्ती हो गई, अब बच्चों को लेकर अंदर आ जाओ । पकौड़े तैयार हैं ।"
मेरा मन आभार से भर गया ।

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