Tuesday, 27 September 2016

दिमाग को रीबूट करें ,तरो ताजा और स्वस्थ रहें

दिमाग को रीबूट करें ,तरो ताजा और स्वस्थ रहें

आजकल की भागदौड़ और जीवन की आपाधापी के बीच दिमाग लगातार क्रियाशील रहता है | सारा दिन अनेकों विचार भी दिमाग पर हावी रहते है | हमारा दिमाग एक अछे सॉफ्ट वेयर जैसा होता है और ईश्वर ने हमें कमाल का ये सॉफ्टवेयर दिया है ,ये एक सुपर कंप्यूटर की मेमोरी कार्ड जैसा है पर हर उद्दात वस्तु की एक सीमा होती है | जिस प्रकार शरीर या मशीन को एक हद तक काम में लाकर थोड़े अंतराल के बीच आराम देना पड़ता हैं उसी प्रकार हमारा मस्तिष्क जो पूरे शरीर को नियंत्रित करता हैं उसे भी तारो ताजा बनाने या आराम देने की जरूरत पड़ती है |
 कंप्यूट पर कई वेब साइट्स को जब हम लगातार एक साथ खोल लेते हैं तो कई बार कंप्यूटर हैंग हो जाता हैं या उसकी डाउन लोडिंग क्षमता कम हो जाती है ,उस समु या तो हम कंप्यूटर को स्विच आफ करते है या रीस्टार्ट करते है | यही नही उसकी मेमोरी पर लोड कम करने के लिए कई अनुपयोगी एप्लीकेशन को डिलीट भे कर देते है |
 अब आप सोचिये कि जब आप के दिमाग पर कई काम या विचार सारे दिन में हावी हो जाते हैं तो आप अपने दिमाग को क्या किसी प्रक्रिया द्वारा हल्का या तरोताजा कर सकते हैं | आज कल तनाव के साथ साथ यादाश्त की कमी ,क्रोध और अवसाद के बीच लोग कई बार स्वयम को दीन हीन मानसिकता से संक्रमित कर लेते हैं | इसका एक बड़ा कारण दिमाग में बढ़ते नए पुराने विचारो घटनाओं का बोझ हैं जो अब एक स्वाभाविक समस्या बन चूका है पर फिर भी हमें अपनी इस समस्या या बोझ को कम करने का प्रयत्न करते रहना चाहिए और इस जीवन को हिम्मत तथा आशावादी नजरिये से भर कर अपनी तथा अपने परिवार की जिम्मेदारियों के बीच जीवंत बने रहने की हर संभव कोशिश करते रहना चाहिए | 
ये जीवन या जिन्दगी बहुत छोटी होती है तो क्यों न इसे घटिया बनाने के बजाय खुशहाल और तनाव रहित बनाने के प्रयत्न किये जाए |
दिमाग को रीबूट करने के कुछ प्रयोग जो आप कर सकते हैं निम्न लिखित प्रकार से हैं –
१.      सुबह सूरज निकलने से पहले जागने का प्रयत्न करें | पानी पिए और हलकी सैर करें | सैर करते समय मौन रहें और अपने श्वास पर ध्यान केन्द्रित करें | अपने घर की छत या लान में बैठकर भी आप अपने श्वास पर ध्यान केन्द्रित करने का प्रयत्न कर सकते है | लम्बी सांस ले और आराम से श्वास छोड़े |आपका श्वास आपको वर्तमान में ले आता है और आप भूतकाल या भविष्य के बारे में सोचने विचारने की प्रक्रिया से बाहर आ जाते हैं |
२.      सुबह उठते ही अखबार या टीवी न देखने बैठें ,आपके शरीर को ,मस्तिष्क को एक मौन कि आवश्यकता है और साकारात्मक विचारों की ,पर टीवी या अखबार आपको नाकारात्मक ख़बरों से भर देगें | इससे कही अच्छा है कि सुबह सुबह हास्य योग कर लिया जाए जिसे शहरों में लाफिंग क्लब में जाकर लोग करते है | हसना और रोना दिमाग की रीबूटिंग के आसान प्रयोग हैं और तनाव को दूर करते हैं |
३.      हल्का भोजन या घर के खाने को ही प्राथमिकता दें और भोजन करते समय न ज्यादा बोले और न ज्यादा सुनें |
४.      दोपहर के लंच के बाद सहकर्मियों के साथ हास्यपूर्ण बातें करें या उनकी किसी उपलब्धि की बात कर सकते हैं | अपने जीवन का कोई सुखद अनुभव भी बाँट सकते है | ये सब आपके मस्तिष्क को नयी ऊर्जा से भर देगा |
५.      बार बार चाय पीने से बचें ,पानी एक एक घंटे बाद जरूर पीने का प्रयत्न करें और दो मिनट के लिए अपने दफ्तर की कुर्सी पर अपने शरीर को ढीला छोड़ दें ,लम्बी स्संस ले और सांस छोड़ें | ऐसा करते समय अपने सांस की आवाज को सुनने का प्रयत्न करें |
६.      एक बात अपने दिमाग में हमेशा याद रखे कि आप सबसे अधिक महत्वपूर्ण है और इस बात को साबित करने के लिए आपको शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना है |
७.      अपने आफिस के कमरें या कंप्यूटर की स्क्रीन पर हरियाली और प्रसन्नता से भरे चित्र लगायें |
८.      घर आकर आपने परिवार वालो से बातचीत करे और अपने आपको मोबाइल ,सोशल नेटवर्किंग तथा न्यूज चेनलों से दूर रखने का प्रयत्न करें | उनके लिए एक समय निश्चित कर लें | बार बार सन्देश  चेक करना या बेकार के कमेंट्स करते रहना और चैट करना भी तनाव का एक बड़ा कारण हैं |
९.      रात को सोने से पहले अपनी दिनचर्या को डायरी में लिखने की आदत डालें या दिनभर में किये गये कार्यों को क्रमवार याद करने का प्रयत्न करें | इश्वर का धन्यवाद करें और कहें कि आपको विशवास है कि ईश्वर हमेशा आपके साथ है और आप हर काम बड़ी आसानी से निपटा सकते हैं |
१०.  नाकरात्मक और बीते हुए का विधवा प्रलाप करने वाले लोगों ,साहित्य तथा मानसिकता से बचने के लिए सफल लोगों के बीच रहें , आशावादी जीवन और साकारात्मक सोच से जुड़े साहित्य को अपना साथी बनायें ,संगीत सुनें और दिन में कम से कम जितनी बार खाना खाते हैं उससे दुगनी बार हंसने का प्रयत्न करें |  टीवी पर आने वाले कॉमेडी शो आपके मानसिक स्वास्थ्य तथा दिमाग की रीबूटिंग  के लिए कही ज्यादा अच्छे हैं |
११.  याद रखिये राष्ट्र पिता के वो तीन बंदर जो न बुरा बोलते है ,न बुरा सुनते हैं और न ही बुरा देखते हैं |


आप अनमोल हैं ,सदा खुशियाँ बांटते रहें |


Friday, 16 September 2016

क्या आप बोरियत से परेशान हैं ?

क्या आप बोरियत से परेशान हैं ?

साथियों बोरियत शब्द हमारे रोजमर्रा के जीवन का एक आम सुना जाने वाला शब्द बन गया है | अब प्रश्न यह है कि बोरियत होती क्यों है और उससे पैदा होने वाली सुस्ती ,खीज ,परेशानी या नीरसता कैसे दूर की जाय | वास्तव में जिस कार्य को शुरू करते समय हमें पहले कुछ मिनटों या घंटों में कोई समस्या महसूस नहीं होती वही  काम हमारे लिए एक समय पर  बोरियत पैदा कर देता है | चित्र में रंग भरना बच्चों के लिए सबसे मनोरंजक कार्य होता है पर यदि उन्हें भी लगातार कई घंटे यही काम दिया जाता रहे तो रंग भरना उनके लिए एक मुसीबत बन जाता है और वे इस काम से थकान और खीज महसूस करते हैं | हम लगातार एक ही किस्म की दाल सब्जी रोजाना खाना पसंद नही करते | हम लगातार रोज किया जाने वाला एक सा काम पसंद नही करते और यदि ऐसा कर रहे है और किसी प्रकार की बोरियत महसूस करते हुए मान नही रहे है तो आपका शरीर और मस्तिष्क धीरे धीरे सुखद अहसासों से रिक्त हो जाता है और आपको पता ही नहीं चलता कि कब लोगो के प्रति अपने काम के प्रति आप अपना सौन्दर्यबोध खोते चले जा रहे है | जीवन में विविधताओं का होना बड़ा जरुरी है | आप उस कलर्क के बारे में सोचिये ,उस दफ्तर में बैठे पत्रकार या टाइपिस्ट के बारे में सोचिये ,उस अध्यापक के बारे में सोचिये ,उस मित्र के  बारे में सोचिये ,उस पडोसी के बारे में सोचिये जो लगातार सुबह से लेकर शाम तक रोजाना एक ही दिनचर्या अपनाये हुए है | सुबह काम पर जाना और शाम को काम से घर लौट आना और  टीवी देख कर खाना खाकर सो जाना ,फिर अगले दिन ऐसे ही करना | उसके जीवन में मित्र ,बातचीत ,सुबह की सैर ,अच्छी किताबें ,खेल कूद ,वीकेंड पर पिकनिक या महीने में एक आध बार परिवार के साथ बाजार जाकर खाना पीना या घूमना ,दूसरों के कामो या सामाजिक कार्यों में कोई भाग न लेना ,हंसने या मजाक की बात करने से परहेज करना जैसी आदतें न के बराबर है या उसकी इस दिनचर्या का हिस्सा नही है तो  इश्वर द्वारा दी इस जिन्दगी का क्या अर्थ है ? ये प्रश्न हमें अपने आप से करना चाहियें |
जरूरत जीवन को मनोरंजन और उत्साह से भरने की है और इसके लिए इसी प्रकार के साधनों या लोगो से मेल जोल बढाने की जरूरत है |
ऑफिस टाइम में जो ऊर्जा कार्य के पहले घंटे में होती है उसे बनाए रखने के लिए हमें अपने आपको रुचिकर बनाना होगा और दूसरो को प्रोत्साहन देना होगा | ना उम्मीदी और नकारात्मकता तब पैदा होते है जब जीवन एक नदी न होकर खड़े पानी जैसा हो जाता है | और जल्दी ही ये खड़ा पानी सड़ कर बदबू उत्पन्न करता है |
आप जरा सोच कर देखे कि जब आपको कार्यक्षेत्र या आफिस में चाय या लंच ब्रेक मिलता है तो आप का रवैया कैसा होता है | किसी मीटिंग या अपने सहकर्मियों के साथ आप का बर्ताव काम करते समय या फुर्सत के पालो में कैसा होता है ? इसके लिए कुछ प्रश्न अपने आप से पूछिए –
१.आप अपने सहकर्मियों की मदद करने में उत्साहित रहते है ?
२. आप अपने किसी सहकर्मी की कोई विशेषता या प्राप्ति उसकी उपस्थिति में दूसरों को बताकर उसका दिन गर्व से भर देते हैं ?
३.आप खाना खाते समय सुखद अहसासों को याद करते हैं और खाने के स्वाद के लिए मन ही मन उसे बनाने वाले कि प्रशंसा करते है ?
4. क्या आप चाय काल या भोजन काल के अंतराल में अपने अच्छे अनुभव अपने साथियों के साथ शेयर करते हैं या अपने काम को लेकर आ रही कठिनाईयों के बारे में उनसे परामर्श लेते हैं ?
५. क्या आपकी दिनचर्या में मित्रों से वार्तालाप ,सैर या अपने घर परिवार के लोगों की उनके काम में सहायता शामिल है ?
६. क्या आप डायरी लिखने ,जीवन व्यवहार पर अच्छी पुस्तके पढने ,संगीत सुनने ,मित्र या परिवार के साथ गपशप करने ,वीकेंड मानाने ,सिनेमा देखने जैसे कार्य कभी कभी करते हैं ?
७. क्या आप अपने कार्यक्षेत्र में किये जाने वाले कामो के लिए पहले अपने आप को तैयार करते है या योजना बनाते हैं ?
८. क्या आप साल में एकाध बार मित्रों या परिवार के साथ कुछ दिन के लिए प्रयत्न यात्रा करते हैं ?
८. क्या आप अपने कपड़ों के रंगों में विविधता पसंद करते हैं या केवल सफ़ेद शर्ट और सफ़ेद कुरता पायजामा पहनना आपकी पसंद बन चूका है ?
इन प्रश्नों के एक सूची तैयार कर रोजाना एक बार सुबह इसे पढ़िए और काम पर निकलिए | अपनी जीवन शैली को बदलने का प्रयास कीजिये | जीवन विविध रंगों के बिना नीरस हो जाता है ,अपने जीवन में रंग भरिये |
आप लोगो को तभी बोर करते है जब आप अपने आप से बोर होते हैं | आप स्वयम को उस समय ऊर्जावान महसूस करते है जब आप दूसरों को प्रसन्नता ,सहयोग और विशवास बांटते हैं | स्वयम से शुरू करे और अपने जीवन में मनोरंजन ,विविधता ,अच्छे अनुभव और प्रेरणात्मक विचार लाने का प्रयत्न कीजिये | रोज सुबह शीशे के सामने अपने बालों को कंघी करते समय और और अपनी वेशभूषा की मैचिंग चेक करते समय मुस्कराइए और यह महसूस कीजिये कि आप कमाल के व्यक्ति है और लोगों के बीच ऊर्जावान और लोकप्रिय बने रहने के सारे गुण आपमें शामिल है | किसी से मिलते समय हाथ मिलाने में पहल कीजिये ,मुस्कुराइए और क्या हाल है ‘कहने के बजाय  कहिये हेलो आज बहुत स्मार्ट लग रहे हैं ? विशवास कीजिये कि घर समाज और कार्यक्षेत्र में आप अपने सुखद अहसासों को याद कर के ,उन्हें बाँट कर और हर दिन सुखद अहसासों का संग्रह करने के लिए प्रेरित रह कर यदि जीवन जियेंगें तो बोरियत और नकारात्मकता आपके आस पास नही भटकेगी | अपने जीवन को लोगो की भीड़ से मत भरिये ,जीवन को सुखद बनाने और मनोरंजन से भरने के लिए हमें केवल पांच या  दस ऐसे लोगो की जरूरत है जो जीवन को सफलता ,ख़ुशी और मनोरंजन के नए आयामों से भरकर रोजाना मुस्कुराते हुए मिलते हैं |
आपका दिन खुशियों से भरा रहे ,ऐसी कामना करता हूँ |
आपका

हरीश 

Sunday, 4 September 2016

योजनाबद्ध रहे ,अनुशासित रहे |

योजनाबद्ध रहे ,अनुशासित रहे |

मै क्या होना/बनना चाहता हूँ ? मै उसके लिए क्या योजना बना रहा हूँ ? अभी तक मैंने अपने लक्ष्य की और कितने कदम बढ़ाये है ? क्या मेरे लक्ष्य के प्रति मै पूरी तरह समर्पित हूँ ? क्या असफलताओं को लेकर मै भयभीत हूँ ? क्या मुझे दूसरों की सफलता से बल मिलता है या ईर्ष्या होती है ?
इन प्रश्नों को अपने जीवन में हर हफ्ते अपने सामने लिखकर देखिये और मन ही मन स्वयं को इनके उत्तर देने का प्रयास कीजिये | शायद आपके जीवन की कई बाधाएं  जो आपने स्वयं अपने इर्द गिर्द बन रखी है उनका समाधान आप स्वयम कर सके | एक बात को जरूर अपना मापदंड बना कर रखे कि इन सभी प्रश्नों के उत्तर देते हुए आप का लाभ किस्मे निहित है | जैसे किसी कि सफलता को देखकर यदि आप प्रेरणा ले रहे हैं या कोई बल महसूस कर रहे है तो वाकई आपका लाभ हो रहा है | पर यदि आप सफल होने वाले व्यक्ति से ईर्ष्या कर रहे है तो ये बहुत ही आत्मघाती है |इस से न केवल आपका मानसिक संतुलन बिगड़ता है बल्कि आप की ऊर्जा भी व्यर्थ होती है यही नहीं शारीरिक तौर पर भी आप अपने आप को कोई नुक्सान पहुंचा सकते है | किसी से ईर्ष्या करना नाकारात्मक विचारों को अपने मस्तिष्क में लाने जैसा है | जहाँ नकारात्मकता आई वहीं आप अपने लक्ष्य से न केवल भटक जाते है बल्कि अपने इर्द गिर्द के माहौल को भी अशांत कर देते है | आपकी हालत एक चोट खाए सांप जैसी हो जाती है | आप लगभग अनुशासन के दायरे से बाहर चले जाते है | क्या आप अनुशासन में रहने के बजाय अफ़सोस के चक्रव्यूह में फसना चाहेंगे ?

अभी कल मेरे एक मित्र मुझे एक पार्टी में मिले | बहुत ही खुशनुमा माहौल में वे पार्टी को इंजॉय कर रहे थे कि अचानक वह पर एक और व्यक्ति दाखिल हुआ और  मेरे मित्र की पूरी मनोस्थिति ही बदल गयी | उसका हँसता हुआ चेहरा मुरझा गया | वो हँसता हुआ एकदम शांत हो गया और उसके माथे पर सिकुडन छा गयी | उसने अचानक उस व्यक्ति के बारे में मुझसे कुछ नाकारात्मक बाते कहनी  शुरू कर दी | वो आदमी हमसे बहुत दूर खड़ा लोगो से मिल रहा था और मुस्कुरा रहा था | मेरे मित्र की नाकारात्म्कता का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़  रहा था | हाँ मेरे मित्र का रक्तचाप और मनोस्थिति जरूर बिगड़ गयी थी |  कोई कारण था कि वो उसे ईर्ष्या करता होगा पर इसका उसे क्या लाभ हुआ ,मुझे उस शानदार पार्टी में समझ नहीं आया | मै उसे उस जगह से दूर एक हाल कमरे में ले गया जहा मेरे मित्र को अपना वो प्रतिद्वंदी (बिना मतलब ) दिखाई देना बंद हो गया तो वो कुछ सहज हो गया | मैंने पहला प्रश्न उसे यही किया कि इस शानदार पार्टी का मजा लेने के बजाय वो उस आदमी के बारे में सोचकर अपना मजा खराब क्यों कर रहा है ? क्या उस व्यक्ति ने उसे भी देखकर ऐसा किया ?
ईर्ष्या  या जलन का तत्व हमें विनाश की और ले जाता है | इसलिए अपने समय और दिमाग की ऊर्जा का प्रयोग इस नाकारात्मक तत्व के लिए न करे | ये आपकी एकाग्रता और लक्ष्य प्राप्ति में सबसे बड़ा भटकाव पैदा कर सकता है | यदि आप अपनी मनोस्थिति को लेकर चेतन है ,सचेत है तो आपकी सफलता निश्चित है | ईर्ष्या की जगह प्रेरणा ले और इसे अपनी कमजोरी बनने के बजाय अपनी ताकत बनाये |
मैंने देखा है कि लोग समाचार पत्रों या टेलीविजन पर नकारात्मक समाचारों से प्रभावित होते रहते है और उन लोगो को लेकर बहस करते है या परेशान होते है जिनका उनके जीवन या कार्यक्षेत्र से कोई लेना देना नहीं होता | पर यह गुण सफल व्यक्तियों में नहीं देखा गया ,वे केवल उन बातों पर ध्यान देते है जिनका प्रभाव उनके कार्य क्षेत्र पर हो सकता है | व्यापारी कारोबार और व्यापार से जुडी बातों पर ज्यादा ध्यान देता है | स्टॉक ब्रोकर शेयर बाजार के चढ़ते गिरते भावों पर ध्यान देता है | खिलाडी खेल से सम्बंधित समाचारों पर ध्यान देते है | ऐसा इसलिए होता है क्योकि वो अपने कार्यक्षेत्र को लेकर अनुशासित रहते है | उन्हें अपने कार्यक्षेत्र के लिए इससे ऊर्जा और राय बनाने में मदद मिलती है | बाकी जो लोग है मै उन पर यहाँ कोई टिप्पणी नही करूँगा हमारे देश के बड़े उद्यमी श्री रत्न टाटा कहते है कि मै जब कोई निर्णय लेता हूँ तो उसके बाद मेरा एक ही लक्ष्य होता है कि उसे सही साबित करना है | वकालत के क्षेत्र में भी क्या हमारे माननीय वकील इसी सूत्र पर काम नहीं करते | बिलकुल करते है | हमें भी अपने लक्ष्यों या निर्णयों को सफलता तक ले जाने के लिए इस गुण को अपनाना होगा और इस मामले में किसी भी नैतिक मूल्य को ठेस न पहुंचे इस बात का ध्यान रखने के लिए पूरी साकारात्म्कता एकाग्रता और अनुशासन के साथ अपनी योजना पर कार्य करना होगा | ये बात ठीक है कि सभी को खुश नही किया जा सकता पर सभी को नाराज करना भी अक्लमंदी नहीं | कुछ लोगो को भी यदि आप प्रसन्नता दे पाए तो यह आपकी उपलब्धि होगी | एक अच्छा बॉस यही करता है ,वो अपने कर्मचारियों को हमेशा प्रोत्साहित करता है और उसे अपनी भविष्य की योजनाओं में शामिल करता है तथा किसी भी लाभ की प्राप्ति पर उनके साथ अपना लाभ किसी न किसी रूप में साझा करता है | सबसे पहले स्वयम में विशवास करे और फिर दूसरों के मन में अपने प्रति विशवास और सहयोग की भावना पैदा करे | मेवा खाने के लिए सेवा का गुण होना बहुत जरूरी है | आज के प्रति स्पर्धा से भरे बाजार में एक प्रसिद्ध कम्पनी जब अपना न्य उत्पाद लांच करती है तो क्या वो उस उत्पाद के प्रति लोगो में अपनी गुणवत्ता और विशवास बनाने का प्रयत्न नही करती | फिर चाहे वो विज्ञापन के माध्यम से हो या किसी अतिरिक्त लाभ का लालच देकर किया गया प्रयास ही क्यों न हो | ये आकर्षण का ही एक महत्वपूर्ण तत्व है | अपने प्रति और अपने कार्य के प्रति आकर्षण पैदा करना ही आज के समय की मांग है |


Friday, 2 September 2016

अच्छे विचारों और ऊंचे चरित्र की संगति करें |

दरअसल उसने अपने दिमाग में दुनिया के सबसे स्वस्थ ,सुखी और सशक्त विचार भर लिए
हम अपने सारे दिन में सबसे अधिक किस बारे में सोचते है ,एक बड़ा मजेदार प्रश्न है | आप हैरान होगे यदि हम उन सब लोगो ,विषयों या विचारों कि एक लिस्ट बनाये जो सारा दिन हमारे दिलों दिमाग पर हावी रहते है | आप देख सकेंगें कि आपकी बनायीं लिस्ट में आये विषय और विचार आपकी जिन्दगी की गति ,लक्ष्य और सपनों को तो प्रभावित कर ही रहे है बल्कि आपकी मानसिक और शारीरिक स्थिति को भी प्रभावित कर रहे हैं |
क्या आप असुरक्षित महसूस कर रहे है ?
क्या आप हीन भावना से ग्रस्त है ?
क्या आप दूसरों की तुलना में स्वयम को कम आंक रहे हैं ?
आपके विचार में सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए अभी आपको बहुत कुछ करना है ?
क्या आप सारे दिन में लोगों के प्रति इर्ष्य से भरे रहते है ?
क्या आपके मित्र आपको नाकारात्म्कता से भरे दीखते हैं ?
उपरोक्त सभी सवाल आपके और मेरे समाज में बहुत महत्वपूर्ण सवाल है | क्या हमें ऐसी बातों के सूची बनाने की जरूरत है जो हमारे खिलाफ है ,क्यों न हम उन बातो की सूची बनाये जो हमारे पक्ष में है | यह ज्यादा महत्व पूर्ण है कि हम अपने व्यक्तित्व के साकारात्मक गुणों का विश्लेष्ण करे |
 हमारा आत्म विशवास ,हमारी विश्वसनीयता  और हमारी प्रतिबद्धिता इन सवालों के बीच लगातार जूझती रहती है | और इन सबकी जड़ में एक ही बात सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है और वो ये कि हम जिस वातावरण में पीला बढे है ,जिसमे हमारे व्यक्तित्व का विकास हुआ है या हो रहा है उसे हम कितनी सजगता से बदलने कि ओर अग्रसर है |
क्या हमारे उदेश्य स्पष्ट है ,क्या हम उन्हें पूरा करने के लिए जो रास्ते अपना रहे है वे सही है या क्या हम अपने चुने हुए रास्तों को बदलने के लिए तैयार होते है ? हमें ये सब सवाल अपने आप से बार बार करने कि जरूरत है | जो लोग आपके सामने आपके साथ रहते हुए आप जैसे हालातों में सफल हुए या तरक्की कि कुलांचे भर रहे है उनमे ऐसा क्या है जिन्हें आप पूरी साकारात्म्कता के साथ अपनाने की कोशिश करते है या फिर केवल उनकी आलोचना कर के या उनमे नुक्स ढूंढ कर अपने अहम को या अपनी असफलता को छुपाने की कोशिश में अपना आत्मविश्वास और आत्मसम्मान खो देते है |
हमें इन सभी सवालो के जवाब उन विचारों से ही मिल सकते है जिनका चुनाव हम खुद करते है और अपने जीवन को सुख या दुःख से भर लेते हैं | एक बात पूरी तरह विश्वसनीय और प्रैक्टिकल है कि आपकी संगती ,आपके विचार आपको चुनाव कि ओर प्रोत्साहित करते है | हम उस चुनाव के आधार पर ही अपने जीवन के नतीजे पाते है | अच्छे  नतीजे जहा आपको प्रोत्साहित करते है वही बुरे नतीजे आप को सुधरने के लिए प्रेरित करते है या आपकी प्रतिबद्धिता को प्रभावित करते है |
सुधरने  की भावना एक बहुत ही साकारात्मक विचार है जिसके लिए जरूरी है कि हम उन सभी नाकारात्मक तत्वों को अपने जीवन से निकाल दें जिन्होंने हमारे जीवन को असफलताओं से भर दिया है |  इसके लिए जरूरी है अच्छे विचारों के प्रति आस्था और विशवास | आस्था एक ऐसी तकनीक है जो आपको आत्मविश्वास से लबरेज कर देती है | इसके लिए आपको बार बार एक बात को दुहराना है “ ईश्वर  सदा मेरे साथ है और उसकी सहायता से मै अपने हर काम को सफलता से कर सकता हूँ |”
सुबह से लेकर शाम तक आप जितने विशवास से इस बात को दुहरायेगें उतने ही आत्मविश्वास और सफलता से आप अपने काम को पूरा कर सकेगें | आपके मित्र या आपका वातावरण जो आप पर नाकारात्मक प्रभाव डाल रहे है उन्हें अपने पर हावी न होने दे | उनकी कही बातों पर विचार करने या सोचने से ज्यादा साकारात्मक विचारों के बारे में सोचे |अपनी  अच्छाइयों को याद करे ,अपने लक्ष्य को याद करे और ये सोचे कि आपको लोगों का दिल जीतना है ,उन्हें प्रसन्न करना है और हमेशा उत्साहित दिखना है | अपने उस वातावरण से बाहर आना सीखिए जिसमे फैली असुरक्षितता आपको एक झूठी सुरक्षितता का आभास दे रही थी | हमेशा सफल और ऊंचे चरित्र वाले लोगो का अनुसरण करें | सफल लोगों में एक प्रकार का अनुशासन होता है उसे सीखने का प्रयास करें | अपने कार्य को लेकर एक संकल्प बनायें | पूरे विशवास के साथ हमेशा कोशिश करते रहे | विशवास की घटनाये वास्तव में बढ़ी हुयी शक्ति को प्रेरित करती है | कभी घबराये नहीं ,अपने डर  को कभी अपना सलाहकार न बनने दें |
अनुशासनहीन लोग हर काम करने की कोशिश करते हैं ,लेकिन उनमे किसी भी काम को करने का संकल्प नही होता | लगातार कोशिश न करना भी अनुशासनहीनता पैदा करता है | प्रथमिकताये टी करने के लिए खुद को अनुशासित करना पड़ता है |
“आपको जिन्दगी में यह फैसला करना है कि आप अनुशासन की कीमत चुकायेंगें या अफ़सोस की” | -टीम कोनोर
जिस तरह की छवि को आप अपनी कल्पनाओं में सजाते है वे आपके कार्य पर प्रभाव डालती हैं ,इसलिए हमेशा एक हस्ते ,मुस्कराते और उत्साहित व्यक्तित्व की छवि मी अपने आपको देखे | अपने आप को जीतते हुए देखे ,मुस्कुराते हुए देखे और अपने बॉस से सम्मानित होते हुए देखे | आपके दिमाग में जितनी सुरक्षा ,विशवास और आस्था की छवि बनेगी आप उतना ही शारीरिक और मानसिक तौर पर संतुष्ट एवं सफल बनेगें | इस पर लगातार काम करे ,जुटे रहे और इस बात का विशवास रखे कि सफलता आपसे कभी दूर नहीं रही ,आपके अधिकारी आप पर भरोसा रखते है और आप लोगों की आलोचना करने के बजाय केवल उनकी अच्छाइयों और सद्गुणों की प्रशंसा कर के उन्हें चेहरे पर मुस्कान लायेगें |
प्रतिक्रिया बहुत अच्छी होगी | आप यकीन मानिए हम अपने इर्द गिर्द एक ऐसा साकारात्मक वातावरण बना पायेंगें जिसमे आप तो बदलेगें ही बल्कि लोग भी आशावादी और उत्साहित रूप से बदलने के लिए बाध्य हो जायेगें | आपका उत्साह और आपके साकारात्मक विचारो पर आपका विशवास आपको शिखर पर ले जायेगा | आपके घर ,कार्यक्षेत्र और समाज के बीच आप अपने आपको स्फूर्ति  और समृद्धि से भरपूर महसूस करेंगें |
सप्रेम

आपका हरीश