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Sunday, 28 August 2016
व्यवहार में लचकता का जादू
जिन टहनियों पर फल या फूल कुछ ऊंचे लगे
होते है ,हमारा हाथ उन तक
नहीं पहुँचता ,तब हम उनकी लचकता का लाभ उठाते हुए और अपनी लचकता का प्रयोग
करते हुए उन्हें हाथ बढ़ाकर अपनी ओर झुका लेते है और फल फूल को अपनी पहुँच में ले
आते हैं । क्या ऐसा हम अपने आस पास फैले उपयोगी और सफल लोगों के साथ भी कर सकते
हैं ?महत्वपूर्ण
लचकता है । कठोरता आपको अंगूर खट्टे हैं जैसी नाकरात्मक्ता ही दे सकती है ।
डार्विन ने लिखा है कि प्रकृति में उन्हीं जातियों का अस्तित्व रहा जिन्होंने अपने
आपको हालातों के अनुकूल ढाल लिया । जो अपने को बदल न सके वे समाप्त हो गए । बदलाव
की लचकता आपको जीवन के नए आयाम देती है |
एक अध्यापक बहुत मेहनती था और उसके
नतीजे भी पिछले कई वर्षों से बहुत अच्छे जा रहे थे | एक दिन एक नया शिक्षा अधिकारी उसके
स्कूल में रूटीन चेकिंग पर आया | उसने अपने ओहदे का प्रभाव जताते हुए अध्यापकों के
पढ़ाने के ढंग की आलोचना शुरू कर दी | वः किसी कि कोई बात या ढंग से सहमत नहीं था |
अधिकारी ने अच्छे नतीजे वाले अध्यापक को
भी नहीं छोड़ा और उसकी खूब आलोचना की | उसके पढ़ाने के तौर तरीकों की कोई सराहना
नहीं की और उसे नियमों के अनुसार बने बनाये तरीको को ही इस्तेमाल करने का आदेश झाड
दिया | अध्यापक का आत्मविश्वास इस सबसे कुछ कम हुआ और वो नाकारात्मक विचारों के
साथ उस दिन रात तक परेशान हो गया | उसने
घर के लोगों के साथ भी अच्छी तरह बात नहीं की | घर में भी उसके परेशानी को
कोई नहीं समझ पाया | अगले दिन से उसके स्कूल का माहौल उसके लिए पूरी तरह बदल गया |
उसे नाकारात्मक विचारों से भरे लोगो की बाते अच्छी लगने लगी | उसने पढ़ने के अपने
नए तरीको को प्रयोग करना छोड़ दिया | उसे लगा कि यदि मेरे काम की कोई प्रशंसा ही
नहीं हो रही और मेरे काम में नुक्स निकाले जा रहे है तो मुझे भी उन लोगों के तरह
काम करना चाहिए जो अपना काम केवल किसी ख़ुशी के लिए नही बल्कि एक खाना पूर्ती के लिए करते है | वहीं एक और
अध्यापक भी काम करता था जिसके तरीके भी बड़े नए और मनोरंजक थे | उसने उस अधिकारी की
बात को बड़े ध्यान से सुना और बिना कोई तर्क किये उसका धन्यवाद किया | उसने अधिकारी
की सराहना करते हुए कहा ,”मै आपका बहुत आभारी हूँ जो आपने मुझे पढ़ने के तरीको में
सुधार करने के लिए कहा ,मै आपको यकीन दिलाता हूँ कि आपके इन बहुमूल्य सुझावों का
प्रयोग आज से ही छात्रों को पढ़ने के लिए करूंगा |” अधिकारी इससे बहुत खुश हुआ और
अध्यापक के साथ नरमी से पेश आने लगा | उस अध्यापक ने अधिकारी के जाने के बाद ऐसे
किसी तरीके का इस्तेमाल नहीं किया जो उसे अधिकारी बता कर गया था | अध्यापक के
नतीजे जिन तरीको से लम्बे समय से अच्छे नतीजे दे रहे थे ,उसने उन्ही तरीको को जारी
रखा | न तो उसने अपनी संतुष्टि गवाई और न ही अपनी ख़ुशी | वः अपने तरीको और जीवन को
लेकर साकारात्मक बना रहा |
इस कहानी का केन्द्रीय भाव यही है कि _
१.जब कोई अधिकारी आपसे सख्ती से पेश
आये और आपको आदेश दे तो कभी भी उससे बहस न करे |
२.अंहकारी व्यक्ति को प्रशंसा से ही
शांत किया जा सकता है |
३.अपनी साकारात्म्कता को बचाने के लिए
नाकारात्मक विचारों से दूर रहे |
इस तरह की परिस्थिति में अपना धैर्य और
आत्म विशवास न खोये | आप के नतीजे आपकी वास्तविक शक्ति हैं उन पर हमेशा गर्व करना
सीखे |
लोगो को सुनना सीखे | क्या करना है या
क्या नहीं करना है ये केवल आप पर निर्भर है | इस मामले में अपने चुनाव अपने तक
सीमित रखे |
इस प्रकार के लोग कभी अधिकारी के रूप
में ,कभी पडोसी के रूप में ,कभी रिश्तेदार के रूप में या सडक पर चलते घुमते किसी
अजनबी के रूप में आपको मिल सकते है | इस दुनिया में सब कुछ अच्छा नहीं है पर हमें
केवल अपनी अच्छाई और गुणवत्ता को बचाना है और इसके लिए निम्न लिखित गुण होना बहुत
जरूरी है _
१.स्वयम पर विशवास
२.बेहतर नतीजों के लिए लगातार प्रयास
३.स्वय को लेकर हमेशा साकारात्म्कता का
भाव
4.परिस्थितियों के अनुसार लचकता
५.नकारात्मक बातों को स्वयम पर हावी न
होने देना
इस संसार में बहुत से लोग ऐसे है
जिन्हें हमेशा आलोचना ही मिली है | उनकी मानसिकता आलोचना से इतनी पीड़ित है कि वे
दूसरों के साथ भी वही करना चाहते है जो उनके अपने साथ होता रहा | आलोचना और
प्रशंसा विहीन जीवन और संगत ने उनके जीवन में इतनी नकारात्मकता भर दी कि उनके जीवन
का सारा आशावाद और लचकता केवल कठोरता और निराशावाद से भर गयी है | वे उच्चरक्तचाप
,मधुमेह और न जाने कौन कौन सी बिमारियों से झूझ रहे है | आपका शरीर आपके विचारो और
सोच से प्रभावित होता है | इस बात को कई शोध सिद्ध कर चुके है | अगर आप के विचार
निराशावादी और नाकारात्मक है तो अच्छी से अच्छी दवा भी आपको ठीक नहीं कर सकती
क्योकि नकारात्मकता एक ऐसी चुम्बक है जो केवल बुरी आदतों और बुरी चीजों को अपनी और
आकर्षित करती है | ऐसे लोगो को बहुत साकारात्मक माहौल की आवश्यकता होती है ,अच्छे
मित्रों की आवश्यकता होती है ,अच्छी पुस्तके ,अच्छी संगती और एक साकारात्मक गुरु
की आवश्यकता होती है | प्रेरणा के साथ साथ उनका सम्मान और प्रशंसा ही उन्हें बदल
सकती है | इनके साथ बहस या तर्क करना अपनी मुश्किलों को बढ़ाना है |
रवैया बदले ,जिन्दगी अपने आप बदल जाएगी
रवैया बदलें ,जिन्दगी अपने आप बदल जाएगी |
आजकल के भाग दौड़
वाले समय में लोग बहुत तनाव भरी जिन्दगी जी रहे है और हर काम उनके लिए एक चुनौती
के रूप में सामने आ रहा है | बहुत से मित्र शिकायत करते है कि आजकल सब कुछ गडबड है
,सिस्टम खराब है ,कोई किसी काम की प्रशंसा नहीं करना चाहता | कईयों के पास समय को
लेकर हमेशा दिक्कत बनी रहती है | वो अपने सुख चैन ,मौज मस्ती या बच्चो कि सही
देखभाल करने के लिए सही समय कब निकाले ,ये एक बड़ा प्रश्न है जिसका उत्तर वो नहीं
खोज पा रहे | वास्तव में इन सारी समस्याओं में हमें उन लोगों पर ध्यान देने की
जरूरत है जो इस व्यस्त समय में भी कभी अपने आप को लेकर शिकायत नहीं करते ,वे हमेशा
अपने सारे काम सही समय पर करते है और हमेशा मुस्कुराते हुए जिन्दगी का आनन्द उठाते
है | फेसबुक या दूसरी सोशल साइट्स पर वे अपने मित्रो के साथ अपने आनन्द और मौज की
तस्वीरे भी शेयर करते है | अब देखने वाली बात यह है कि एक जैसे कार्य क्षेत्र और
परिस्थिति में रहते हुए लोगो की जीवन शैली में इतना बदलाव क्यों दिख रहा है ?
बचपन में पढ़ी प्यासे
कौए की कहानी जो देखने में एक बाल कहानी है और बहुत छोटी है ,उसमे एक बड़ा अर्थ
छुपा हुआ है | थोड़े से कंकर डालने से पानी ऊपर आ गया ,ऐसा नही था | आप खुद प्रयोग
कर के देखे कि चोंच में उठाये जाने वाले छोटे छोटे कंकर घड़े के पानी को ऊपर लाने
के लिए कितनी तादाद में चाहिए होगें | आप हैरान होगे कि कौए की कहानी का जो सार है
जहाँ चाह ,वहा राह वास्तव में उसकी मेहनत ,सकारात्मक सोच और सही रवैये को भी
दर्शाता है | इतनी भीषण परिस्थिति में भी उसकी चाहत को बल देने वाली ताकत उसकी
सहजता और रवैये में छुपी है जिसके
प्रोत्साहन से वो न केवल पानी का स्तर ऊपर लाने की तरकीब निकलता है बल्कि उसके
स्टार को अपनी कड़ी मेहनत के साथ ऊपर ले आता है | हम सब भी उस प्यासे कौए जैसे ही
है | सफलता आसानी से नहीं मिलती ,उसे पाने के लिए आसन तरीको पर सकारात्मक रवैये से
काम करना पड़ता है |
सफल लोगो और असफलता
से निराश हो जाने वाले लोगों में बहुत बारीक अंतर होता है | मेरे ख्याल से समय
प्रबंधन ,चीजों को देखने का रवैया या अपने आप को बदलने का प्रयास इस अंतर का बड़ा
कारण है | हम करना क्या चाहते है ,क्या प्राप्त करना चाहते है ,और काम को करते समय
या जिन्दगी जीते समय हम क्या बन रहे है इन
बातो पर नए सिरे से सोचने विचारने की जरूरत है | शायद जिन्दगी की समस्याओं के लिए
बाहरी कारण इतने जिम्मेवार नहीं जितना कि हमारा उन को लेकर रवैया | रवैया ही
जिन्दगी बनाता है | इसलिए लोगो से बात करते समय ,काम करते समय और जीवन कि सारी
योजनाओं या सपनो को लेकर हमारा रवैया क्या है ,पर ध्यान देना बहुत जरुरी है | हमें
सफल लोगो का अनुकरण करना जरुरी है |इससे जुड़े कुछ प्रश्न आपके सामने हैं -
आप जिसके जैसा बनना चाहते है क्या आप उसके लाइफ
स्टाइल पर ध्यान दे रहे है ?
क्या आप लोगो से मिलते समय मुस्कुराते है ?
क्या आप उनकी मदद
करने और उनसे मदद मांगने में हिचकिचाते तो नहीं हैं ?
क्या आप लोगो की
प्रशंसा करते है ?
क्या आप अपनी
प्रशंसा करते है?
क्या आप लोगों में खामिया निकलने से ज्यादा उनकी अच्छाइयों के
लिए उनकी सराहना करते है ?
क्या आप लोगो का
धन्यवाद करने में हमेशा तैयार रहते है ?
उपरोक्त सभी प्रश्न
आजकल की एकाकी और मुकाबले की दुनिया में बड़े महत्व पूर्ण है | हमें सकारात्मक होकर
और अपने नकारात्मक रवैये को त्यागकर अपने व्यक्तित्व की एक नयी परिभाषा बनानी होगी
| आप किसी भी कार्य क्षेत्र में हो ,किसी भी पद पर हो ,साकारात्मकता ,प्रोत्साहन
,समय प्रबंधन और लोगों से प्रेमपूर्ण व्यवहार आपके जीवन को खुशहाल बनाने का सबसे
सरल तरीका है | सभी सफल लोगो की और देखिये ,उनके पास अपनी बात को सकारात्मक ढंग से
प्रेषित करने और लोगो के साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार करने का जो रवैया है वो उनकी सबसे
बड़ी शक्ति है | आपने हमेशा देखा होगा कस्टमर केयर वालो को फोन पर या व्यक्तिगत तौर
पर आपसे मिलकर बात करते हुए | वे जिस प्रेमपूर्ण और साकारात्मक रवैये से अपने काम
को पेश करते है और आपकी बात सुनते है और आप कितना
भी आक्रामक या नाकारात्मक रवैया अपनाये ,वे अपना रवैया नहीं बदलते और आप को
आदरपूर्ण ढंग से लेते है ,वो बड़ा प्रशंसनीय होता है | हमें लगता है कि घर समाज या
कार्य क्षेत्र में हमारा रवैया भी उनके जैसा हो तो हमारे साथ साथ पूरे समाज में
क्रांतिकारी परिवर्तन हो सकता है | हम अपने तनाव पर काबू पा सकते है ,हम कई
बीमारियों से निजात पा सकते है और परिवार तथा कार्य क्षेत्र में स्वस्थ वातावरण का
संचार कर सकते हैं |
रवैये को बदलने की
यात्रा हमें स्वयम से शुरू करनी होगी ,हो सकता है आपको शुरू में कुछ कठिनाइयाँ आये
,नकारात्मक लोग आपकी सहजता को परखे पर आपका आत्मविश्वास जितना मजबूत होगा ,अपने आप
को बदलने का निश्चय जितना पक्का होगा आप उतना
ही अपने वर्तमान और भविष्य को खुशहाल बनाने में सफल होगे | मै ये कर सकता
हूँ ,मुझे खुश रहना है ,मुझे सफल होना है और लोकप्रिय होना है ,का भाव या विचार
आपके आत्मविश्वास और रवैये को और भी साकारात्मक बनाएगा और आप मानसिक ,शारीरिक
,सामाजिक और आर्थिक स्तर पर अपने आपको बेहतर बना पायेगें | स्वयम पर विशवास रखिये
और अपने आप को प्रकट करने के बेहतर तरीके अपनाइए | आलोचना से कही अधिक जरुरी है
लोगो को प्रोत्साहित करना और उनके साथ मिलकर चीजो को सुधारने का रवैया रखना |
अपने दुःख और सुख
में लोगो को शामिल कीजिये ,दूसरों की प्रशंसा कीजिये ,मदद करने के लिए तैयार
रहिये और एक दुसरे से मुस्कुराकर मिलते
रहिये ,नकारात्मक तत्वों से दूर रहने का प्रयास कीजिये , ईश्वर का धन्यवाद कीजिये
आप जो चाहते है आपको अवश्य मिलेगा |
-डा हरीश कुमार
मो -9463839801
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