संवेदनाओं के पंख / दिव्य-दृष्टि: कहानी - ग्रीटिंग कार्ड - हरीश कुमार: कहानी का अंश... वो शायद कालेज के दिनों का पहला प्रेम रहा होगा शायद नहीं भी । पास से गुजरते हुए अपनी ही सहपाठिका का मुस्करा भर देना प्रेम ह...
gratitude is the real solution.
Tuesday, 21 August 2018
Sunday, 24 June 2018
Emotional imbalance
Emotions #008
Follow my writings on https://www.yourquote.in/sharma.harish #yourquote
Saturday, 23 June 2018
Tuesday, 19 June 2018
आपका स्वास्थ्य आपकी सबसे बड़ी नियामत है ।
आप बहुत खुशकिस्मत हैं कि जिंदा और स्वस्थ हैं ।
एक बार एक आदमी अपने जीवन से निराश होकर एक साधु के पास गया । साधु ने उसकी निराश का कारण पूछा तो वह बोला,"मैं एक गरीब आदमी हूँ और अपनी गरीबी से इतना तंग आ गया हूँ कि मेरे पास जीने की कोई वजह नही है । साधु ने कहा कोई बात नही,मैं तुम्हारी गरीबी दूर कर सकता हूँ और तुम्हे बहुत से धन दे सकता हूँ पर तुम्हे इसके बदले मुझे कुछ देना पड़ेगा ।
आदमी खुश हुआ और बोला ,मैं आपको क्या दे सकता हूँ,मेरे पास आपको देने के लिए कुछ भी नही है ।"
साधु ने कहा,यदि तुम मुझे अपनी दोनों आँखे मुझे दे दो तो मैं तुम्हे दो लाख दे सकता हूँ । या अपने दोनों हाथ,पैर,मुंह,पेट कोई भी अंग ,सबकी कीमत बीस लाख रुपये दे सकता हूँ ।"
आदमी हैरान था,"वो बोला अजीब बात कर रहे है आप,हाथों के बिना मैं काम कैसे करूँगा,पैरों के बिना मैं चलूंगा कैसे,और पेट और मुंह के बगैर तो जीवन की कल्पना ही मुश्किल है ।"
साधु मुस्कुराया और बोला,"तुम तो कह रहे हो कि तुम गरीब हो जबकि तुम्हारे शरीर का हर के अंग इतना कीमती है कि तुम बड़ी कीमत पर भी इन्हें नही बेचना चाहते ।"
आदमी को बात समझ मे आ गयी और वो बोला,"मैं जान गया हूँ कि हमारा स्वस्थ शरीर हमारी सबसे बड़ी अमीरी है और इसके हर अंग के लिए मुझे परमात्मा का आभारी होना चाहिए । मैं प्रण लेता हूँ कि अपनी शारीरिक मेहनत और हिम्मत से खूब मेहनत करूँगा और कभी हिम्मत नही हारूँगा ।"
ये कहानी बताती है कि जो स्वास्थ्य का खजाना हमारे पास है उसके रहते हमे ईश्वर का धन्यवाद होना चाहिए न कि उन चीजों को लेकर निराश होने चाहिए जो हम अपने आलस या निककमेपन की वजह से प्राप्त नही कर पा रहे । स्वास्थ्य और तंदरुस्त शरीर एक ऐसी उपलब्धि है जो आपको सब कुछ करने का जोश देती है आपका शरीर आपकी सफलता की नींव है । शरीर बीमार है ,रोगी है या आप किसी भयंकर बीमारी से जूझ रहे हैं तो शहर के बड़े हस्पतालों के ए सी लगे कमरों के बिस्तर पर पड़े हुए भी आप अपने आपको दुनिया का सबसे गरीब कमजोर इंसान मानेगें ।
हिंदी और बॉलीवुड फिल्मों के शानदार अभिनेता इरफान खान हर दिल अजीज है । उनकी एक्टिंग भारतीय सिनेमा का मील पत्थर है । बदकिस्मती से पिछले कुछ दिनों से वे दिमाग के कैंसर से पीड़ित हो गए है और विदेश के एक हस्पताल में भर्ती है । आज उनके पास पैसा है,शोहरत है,जीवन की हर सुविधा है पर जीवन खतरे में है । उनका एक पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया में छपा है जिसमे जीवन की कामना और छोटी छोटी खुशियों के लिए वो अपनी बीमारी के कारण अवसाद ग्रस्त हो गए है-
कुछ महीने पहले अचानक मुझे पता चला था कि मैं न्यूरोएंडोक्रिन कैंसर से ग्रस्त हूं। मैंने पहली बार यह शब्द सुना था। खोजने पर मैंने पाया कि इस शब्द पर बहुत ज्यादा शोध नहीं हुए हैं। क्योंकि यह एक दुर्लभ शारीरिक अवस्था का नाम है और इस वजह से इसके उपचार की अनिश्चितता ज्यादा है। अभी तक अपने सफ़र में मैं तेज़-मंद गति से चलता चला जा रहा था ... मेरे साथ मेरी योजनाएं, आकांक्षाएं, सपने और मंजिलें थीं। मैं इनमें लीन बढ़ा जा रहा था कि अचानक टीसी ने पीठ पर टैप किया, ’आप का स्टेशन आ रहा है, प्लीज उतर जाएं।’ मेरी समझ में नहीं आया... न न, मेरा स्टेशन अभी नहीं आया है...’ जवाब मिला, ‘अगले किसी भी स्टॉप पर उतरना होगा, आपका गंतव्य आ गया...’ अचानक एहसास हुआ कि आप किसी ढक्कन (कॉर्क) की तरह अनजान सागर में अप्रत्याशित लहरों पर बह रहे हैं। लहरों को क़ाबू करने की ग़लतफ़हमी लिये।
इस हड़बोंग, सहम और डर में घबरा कर मैं अपने बेटे से कहता हूं, ’आज की इस हालत में मैं केवल इतना ही चाहता हूं... मैं इस मानसिक स्थिति को हड़बड़ाहट, डर, बदहवासी की हालत में नहीं जीना चाहता। मुझे किसी भी सूरत में मेरे पैर चाहिए, जिन पर खड़ा होकर अपनी हालत को तटस्थ हो कर जी पाऊं। मैं खड़ा होना चाहता हूं।’
ऐसी मेरी मंशा थी, मेरा इरादा था...
कुछ हफ़्तों के बाद मैं एक अस्पताल में भर्ती हो गया। बेइंतहा दर्द हो रहा है। यह तो मालूम था कि दर्द होगा, लेकिन ऐसा दर्द? अब दर्द की तीव्रता समझ में आ रही है। कुछ भी काम नहीं कर रहा है। न कोई सांत्वना और न कोई दिलासा। पूरी कायनात उस दर्द के पल में सिमट आयी थी। दर्द खुदा से भी बड़ा और विशाल महसूस हुआ।
मैं जिस अस्पताल में भर्ती हूं, उसमें बालकनी भी है। बाहर का नज़ारा दिखता है। कोमा वार्ड ठीक मेरे ऊपर है। सड़क की एक तरफ मेरा अस्पताल है और दूसरी तरफ लॉर्ड्स स्टेडियम है। वहां विवियन रिचर्ड्स का मुस्कुराता पोस्टर है, मेरे बचपन के ख़्वाबों का मक्का। उसे देखने पर पहली नज़र में मुझे कोई एहसास ही नहीं हुआ। मानो वह दुनिया कभी मेरी थी ही नहीं।
मैं दर्द की गिरफ्त में हूं।
और फिर एक दिन यह एहसास हुआ... जैसे मैं किसी ऐसी चीज का हिस्सा नहीं हूं, जो निश्चित होने का दावा करे। न अस्पताल और न स्टेडियम। मेरे अंदर जो शेष था, वह वास्तव में कायनात की असीम शक्ति और बुद्धि का प्रभाव था। मेरे अस्पताल का वहां होना था। मन ने कहा, केवल अनिश्चितता ही निश्चित है।
इस एहसास ने मुझे समर्पण और भरोसे के लिए तैयार किया। अब चाहे जो भी नतीजा हो, यह चाहे जहां ले जाए, आज से आठ महीनों के बाद, या आज से चार महीनों के बाद, या फिर दो साल... चिंता दरकिनार हुई और फिर विलीन होने लगी और फिर मेरे दिमाग से जीने-मरने का हिसाब निकल गया!
पहली बार मुझे शब्द ‘आज़ादी ‘ का एहसास हुआ, सही अर्थ में! एक उपलब्धि का एहसास।
इस कायनात की करनी में मेरा विश्वास ही पूर्ण सत्य बन गया। उसके बाद लगा कि वह विश्वास मेरे हर सेल में पैठ गया। वक़्त ही बताएगा कि वह ठहरता है कि नहीं! फ़िलहाल मैं यही महसूस कर रहा हूं।
इस सफ़र में सारी दुनिया के लोग... सभी, मेरे सेहतमंद होने की दुआ कर रहे हैं, प्रार्थना कर रहे हैं, मैं जिन्हें जानता हूं और जिन्हें नहीं जानता, वे सभी अलग-अलग जगहों और टाइम ज़ोन से मेरे लिए प्रार्थना कर रहे हैं। मुझे लगता है कि उनकी प्रार्थनाएं मिल कर एक हो गयी हैं... एक बड़ी शक्ति... तीव्र जीवन धारा बन कर मेरे स्पाइन से मुझमें प्रवेश कर सिर के ऊपर कपाल से अंकुरित हो रही है।
अंकुरित होकर यह कभी कली, कभी पत्ती, कभी टहनी और कभी शाखा बन जाती है... मैं खुश होकर इन्हें देखता हूं। लोगों की सामूहिक प्रार्थना से उपजी हर टहनी, हर पत्ती, हर फूल मुझे एक नयी दुनिया दिखाती है।
एहसास होता है कि ज़रूरी नहीं कि लहरों पर ढक्कन (कॉर्क) का नियंत्रण हो... जैसे आप क़ुदरत के पालने में झूल रहे हों!"
पानी की कीमत प्यासा और भोजन की कीमत भूखा आदमी महसूस करता है । अच्छी नींद की कीमत वही जान सकता है जिसने दिन भर हाड़ तोड़ मेहनत की है और आखिर में ये सब महसूस करने के लिए आपके पास एक तंदरुस्त शरीर होना सबसे बड़ी उपलब्धि है । शरीर मे एक स्वस्थ दिमाग जो आपको सपने,विचार और उत्साह से भरपूर रखे ।
तो आइए अपने स्वस्थ शरीर के लिए अपने सौभाग्यशाली माने और इसमें प्रकृति के पंच भूतों के प्रति मिट्टी,हवा,सूर्य,पानी और परमात्मा के प्रति आभारी हो ।
धन्यवाद,धन्यवाद,धन्यवाद ।
Sunday, 17 June 2018
यात्राएं हमारे कम्फर्ट जोन को तोड़ती हैं ।
यात्राएं हमें नई ऊर्जा से भरती हैं ।
छुट्टियां होती है तो हमारा मन यात्रा को जाने के लिए लालायित हो जाता है । आदमी का मन लगातार एक जैसी चीजें करने का आदी नहीं है, इसलिए उसे नई जगह पर जाना भाता है ,नया करना अच्छा लगता है। यात्रा करने की इच्छा बताती है कि अभी भी आप में बहुत जीविट है ।आप जिंदगी को और जानना चाहते हैं ।नई चुनौतियों का सामना करना चाहते हैं ,और अपने कंफर्ट जोन को छोड़कर नई आशाओं और नई उमंगों में जीने के लिए और अभ्यास करना चाहते हैं । जीवन भी रुकने का नाम नहीं है ।जीवन निरंतर चलने की प्रक्रिया है। लगातार चलते रहना, लगातार काम में जुटे रहना, लगातार संघर्ष करते रहना लगातार नई-नई भावनाएं ढूंढते रहना, यह प्रगतिशील मनुष्य की निशानी है । यह दिखाती है कि मनुष्य बहुत ही चेतन शील और जिज्ञासु प्राणी है, जो हमेशा कुछ ना कुछ जानने के लिए सीखता रहता है, चलता रहता है और आगे बढ़ता रहता है ।यात्रा का लाभ भी वही है । ये सब कुछ हम अपने जीवन की छोटी छोटी यात्राओं में पाते हैं ।प्रकृति की ओर जाना और खुली स्पेस में जाकर मुक्त विचरण करना हमे अपने आदि स्वभाव का नतीजा है ।
वैसे तो अगर हम देखें हम अपने कंफर्ट जोन में रहना पसंद करते हैं जहां लोग हमें जानते हो ।जहां ऐसा स्थान हो जिसके बारे में हम परिचित हो ,पर ऐसी जगह पर जाना ,ऐसी जगह पर जाकर घूमना और ऐसी जगह पर जाकर उन लोगों से मिलना जुलना और बातचीत करना ,जिन्हें हम नहीं जानते यह अपने आप में एक नया एडवेंचर है ।
एक जगह अगर पानी भी रुक जाए तो वह ज्यादा देर साफ नहीं रहता उसमें सड़ांध उत्पन्न हो जाती है ।
इसी प्रकार जीवन भी लगातार चलते रहना चाहिए चलते रहने से नए विचार नहीं चेतना और नए अनुभव सीखने को मिलते हैं । हमारा माइंड या चेतना जैसे रीबूट हो जाती है ।यह जीवन में ताजगी और रोमांच भरने के लिए बहुत जरूरी है । जब आप यात्रा करते हैं तो आप सोचिए कि आपने यह यात्रा का अनुभव कहां से सीखा। आप के मां बाप आपको बचपन में अपने साथ बाहर यात्राओं पर लेकर गए और उससे आपने नए अनुभव सीखे ।अब आप भी खुद जाते हैं या अपने बच्चों को लेकर जाते हैं तो वहीं संस्कार आप उनमें डालते हैं । यात्रा हमारी परंपरा का हिस्सा हैं । जिन्होंने यात्राएं की उन्होंने नए देश,नए विचार और नई सम्भावनाएं खोज ली ।
यात्रा करना बहुत ही लाभकारी है। मैंने देखा है कि यात्रा के दौरान जो लोग बहुत ही अस्वस्थ होते हैं या बहुत ही निराशावादी होते हैं ।उनमें भी एक नई आशा का संचार हो जाता है। नई जगह पर जाकर कई बार वह नए दृश्यों और नए लोगों के बीच रहकर बहुत कुछ नया सीखते हैं ।नई जगह पर जाकर लोगों से मेलजोल बढ़ाना उनके बीच अपना एक आधार बनाना और उसी प्रकार नई परिस्थितियों में अपने आप को ढालना और यात्रा के दौरान अपने रहन-सहन को व्यवस्थित करना, आपको जीवन में भी बहुत कुछ सिखाता है ।जीवन में भी जब आप चाहे नौकरी में हो चाहे व्यवसाय में हो चाहे ,आप किसी भी कार्य क्षेत्र में हो ,वहां आपको इसी प्रकार लोगों से मिलना-जुलना पड़ता है। उनके अनुसार स्वयं को या उनको ढालना पड़ता है । उन्हें अपनी बात के लिए उन्हें सहमत करना होता है ।यह सारी चीजें आप यात्रा से बड़ी आसानी से सीख सकते हैं ।यात्राएं आपको सबक देती हैं और नए अनुभवों से भर देती हैं ।जिन्हें आप नए सिरे से अपने चल रहे जीवन में लागू करके और अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं और अधिक व्यवहार के ढंग सीख सकते हैं । अधिक व्यवस्था के साथ अपने आप का सामंजस्य बिठाने की कला सीख सकते हैं ।यह आपको जहां मजबूत बनाती हैं वहीं नए दोस्त बनाने के लिए भी अग्रसर करती हैं ।
यात्राएं आपको मानसिक ही नहीं बल्कि शारीरिक ऊर्जा भी देती हैं ।आपके स्वास्थ्य को आपके मन को आपकी मानसिक अवस्था को बदलने में सहायक बनती हैं ।यात्राएं आपके भीतर कल्पनाओं को जन्म देती हैं ।नईऔर सुंदर कल्पनाओं को और अगर यात्राओं में जोखिम भी हो तो वह आपको चुनौतियों से सामना करने के लिए काबिल बनाती हैं ।
अंत में यही कहना चाहूंगा कि आप की यात्राएं सुखद और मंगलकारी हो और आपको नए आयामों और नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए लाभकारी सिद्ध हो ।
Tuesday, 12 June 2018
हरियाली और स्वास्थ्य सबसे बड़ा धर्म है ।
सुबह उठते ही ताजी हवा,आस पास फैले हरे भरे पेड़ औऱ कोयल तोतों की रसभरी आवाज में लिपटी शांति प्रकृति की सबसे बड़ी नियामत है । नहाते और पीते वक्त पानी मे हमे अपना अक्स उतना ही साफ दिखता है जितना हम उसे साफ और शुद्ध रख पाए है । पर्यावरण की इन सभी नियामतों के लिए शुक्रिया । आप खुद सोचिये की हमे जो इस ग्रह पर मिला है वो सब कुछ कितना कीमती है और जीवनदायी है ,क्या इनके प्रति हमें अपना कोई फर्ज नही निभाना चाहिए । सूर्य जो एक संतुलित दूरी से हमारे ग्रह को ऊर्जा देता है । जिसकी रौशनी चारो ओर फैली वनस्पति को प्रकाश संश्लेषण में मदद कर भोजन देता है और हमे विटामिन डी के तत्व जो हमारी चमड़ी और हड्डियों के लिए बहुत जरुरी है । सुबह सैर करते समय ताज़ी हवा या ऑक्सीजन जो हमारे पूरे शरीर के सिस्टम को चलायमान रखती है,कितनी बड़ी नियामत है । पेड़ पौधों से बनने वाली जड़ी बूटियां,फल और उनके द्वारा वातावरण के तापमान को संतुलित रखने में दिया जाने वाला योगदान न हो तो हमारा ग्रह बाकि ग्रहों की तरह जीवनहीन हो जाये । सूर्य हमारे पिता जैसा है जो हमें जीने की ऊर्जा देता है और पृथ्वी माँ जैसी जो हमारा भरण पोषण करती है । इनके लिए हमें आभारी और धन्यवादी होना होगा तथा इनके लिए अपने दिलों में सम्मान और देखभाल की भावना भरनी होगी ।
अब कुछ और दृश्य भी सामने है जिनमे गली मोहल्लों में फैला प्लास्टिक कचरा ,खुले सीवरेज और नालियों से उठती बदबू और दूषित जल से फैलती बीमारियां ये सब हम मनुष्यों की देन है जो हमने प्रकृति को दी । हमने क्या के बदले क्या लौटाया, इससे हमारा चरित्र स्पष्ट होता है । अन्धधुन्ध पेड़ों की कटाई औऱ दलाली के लालच से बढ़ता नगरीकरण,कीटनाशकों का अन्धधुन्ध प्रयोग,पशुओं का दोहन करने वाले इंजेक्शन,खत्म होती पक्षी प्रजातियां ये सब हमने दिया । कोई एक वर्ग इसके लिए जिम्मेदार नही हम सब जिम्मेदार हैं । हमारा लालच और स्वार्थी मन हमें भस्मासुर बना रहा है । धार्मिक प्रवचन औऱ धार्मिक गुरु जितने हमारे देश मे हैं उतने कही नही । वेद ग्रन्थ सभी प्रकृति की महिमा गाते हैं । पर हमें बेकार और झूठी कथाएं सुनने से फुर्सत नही । धार्मिक दिखने से ज्यादा धार्मिक बनना हो तो अपने धर्म गर्न्थो को पढ़िए, उन्हें केवल माथा टेकने या रटने के लिए मत रखिये । अपने घरों में कम से कम चार पेड़ लगाइये, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करिए, कागज का प्रयोग कम से कम कीजिये, डिजिटल साधनों का प्रयोग करें,किचन गार्डन बनाइये,कम पानी वाली फसलों और अनाज को बढ़ावा दीजिये,थोड़ी दूर जाना हो तो पैदल चलिए । आपका शरीर और आपका वातावरण सबसे बड़ा धर्म है,इसे बचाइए । आइए हम सब इस धरती के सच्चे सेवक बने । ये काम केवल हम कर सकते हैं । हमारा सबसे बड़ा धर्म उन वस्तुओं के लिए आभारी और उत्तरदायी होना है जो हमें जीवन देती है जिनके कारण हम जीवित और स्वस्थ है । ग्लोबल वार्मिंग हमारे स्वार्थ का नतीजा है । हमने केवल लेना सीखा है ,देना नही । पर अगर अपनी इस आदत को न बदला तो हम अपनी सुन्दर पृथ्वी को प्लास्टिक कचरे के ढेर से बना एक टापू बना देंगे । जिस पर सिर्फ बदबू और बीमार जीवन के अंतिम अवशेष बचेंगे । आइये पृथ्वी बचाएं ,पेड़ लगाए,पानी बचाये और एक स्वस्थ जीवन जीने का संकल्प ले । असली सम्पन्नता स्वास्थ्य है और वो धरती की हरियाली और स्वच्छता से संभव है ।
Monday, 11 June 2018
जो हम देते है,वही हमे वापस मिल रहा है ।
जिस के पास जो होता है वही चारों ओर बिखेरता है । फूल खुशबू और कांटा कुरूपता । दोनों एक दूसरे के पूरक है पर हम फूल का चुनाव करते है । यहीं हमारा चरित्र है । जीवन मे भी बस यही करना है,दुखों और मुसीबतों पर समय बर्बाद करने के बजाए केवल खुशियों को खोजने और फैलाने का चुनाव करें । स्पर्श,मुस्कुराहट,आलिंगन,हास्य,प्रेम,आशा,प्रशंसा और सकारात्मक प्रयत्न आपको हमेशा दुगने मिलते हैं जब आप ये दूसरों को देते हैं । हम फ़िल्म देखते है तो खलनायक से ज्यादा हमें नायक प्रभावित करता है क्योंकि हमारे भीतर भी एक छुपा नायक है जो जीतना चाहता है,लोकप्रिय होना चाहता है । वास्तविक जीवन मे भी क्या हम नायक बनने के लिए सभी सकारात्मक और अच्छे कामों में जुटने के लिए तैयार है । एक नायक के पास मेहनत,योजना,प्रेम,दूसरों की भलाई के लिए खुद को हमेशा तैयार रखना और उनकी मदद करने की ततपरता रहती है । यही गुण उसे हीरो या नायक बनाते है । वो मुश्किलों से घबराता नहीं बल्कि उनमे कोई न कोई हल ढूंढ लेता है । वो अपने क्रोध को,संयम को,प्रेम को ,सद्भाव को और सहयोग को सही समय और सही जगह पर प्रदर्शित करता है । हम सब ये कर सकते हैं बस हमें इसका अभ्यास करना पड़ता है । हमारे संस्कार हमारे बचपन की यादों और प्रभावों से जुड़े होते है ,कई बार ये ज्यादा अच्छे अनुभव नहीं ले पाते पर फिर भी बड़े होते समय हम समाज और स्कूल शिक्षा से अच्छे लोगों और अच्छे मित्रों के बीच रहकर बदल जाते हैं । हमे मित्रता,संयम ,प्रेम और सहयोग की सकारात्मक परिभाषा अपने अचार व्यवहार में लाने की सीख मिलती है । आप सोचिए कि आप खुद दूसरों से प्यार,सहयोग,हमदर्दी और प्रशंसा नही चाहते? बस यही दूसरे आपसे चाहते हैं । प्रकृति का यही नियम है जो हम देते हैं जो हम सोचते हैं वही हमारी आदत बन जाता है वही हमे मिलता है । और यकीन मानिए कि यदि आपके आस पास ये सब देने वाले लोग और मित्र है,परिवार है तो आप सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं ।
खुशी की कहानी
एक कहानी खुशी की
तेज गर्मी के कारण मन बोरियत से भरा था । ऊपर से छुट्टियां थी । लोग बाग पहाड़ो में,वादियों में घूमते अपनी सेल्फी सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे थे । उन्हें खुश देखकर थोड़ी जलन हुई पर फिर याद आया कि जहां हो जैसे हो उससे निराश न हो ,अपनी नियामतों के लिए सदा आभारी रहोगे तो सब अच्छा होगा । मैं घर के बागीचे में चला गया । बच्चे वहाँ लूडो खेल रहे थे । मुझे अपना बचपन याद आ गया । मैं उनके खेल में शामिल हो गया । अब मन खुश था । अचानक बादल घिर आये । धीमी बारिश शुरू हो गई । हवा रोमानी हो गयी । बारिश की गति बढ़ गयी । मैं बच्चों के साथ बारिश में नहाने लगा । ऐसा लगा जैसे पर्वतों की ताजगी और हरियाली चारों ओर फैल गयी हो । खूब नहाया,मस्ती की । बारिश भी जैसे नाचने के मूड में थी । सोचा कि जब छोटा था और ऐसी बारिश होती तो मां पकौड़े,मालपुए और खीर बनाया करती । सब जम के खाता । मन ही मन मैंने अपने भीतर उस स्वाद को महसूस किया । मन ही मन इस अनुभूति के लिए ईश्वर को कई बार धन्यवाद कहा । अचानक पत्नी की आवाज आई,
"बहुत मस्ती हो गई, अब बच्चों को लेकर अंदर आ जाओ । पकौड़े तैयार हैं ।"
मेरा मन आभार से भर गया ।
तेज गर्मी के कारण मन बोरियत से भरा था । ऊपर से छुट्टियां थी । लोग बाग पहाड़ो में,वादियों में घूमते अपनी सेल्फी सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे थे । उन्हें खुश देखकर थोड़ी जलन हुई पर फिर याद आया कि जहां हो जैसे हो उससे निराश न हो ,अपनी नियामतों के लिए सदा आभारी रहोगे तो सब अच्छा होगा । मैं घर के बागीचे में चला गया । बच्चे वहाँ लूडो खेल रहे थे । मुझे अपना बचपन याद आ गया । मैं उनके खेल में शामिल हो गया । अब मन खुश था । अचानक बादल घिर आये । धीमी बारिश शुरू हो गई । हवा रोमानी हो गयी । बारिश की गति बढ़ गयी । मैं बच्चों के साथ बारिश में नहाने लगा । ऐसा लगा जैसे पर्वतों की ताजगी और हरियाली चारों ओर फैल गयी हो । खूब नहाया,मस्ती की । बारिश भी जैसे नाचने के मूड में थी । सोचा कि जब छोटा था और ऐसी बारिश होती तो मां पकौड़े,मालपुए और खीर बनाया करती । सब जम के खाता । मन ही मन मैंने अपने भीतर उस स्वाद को महसूस किया । मन ही मन इस अनुभूति के लिए ईश्वर को कई बार धन्यवाद कहा । अचानक पत्नी की आवाज आई,
"बहुत मस्ती हो गई, अब बच्चों को लेकर अंदर आ जाओ । पकौड़े तैयार हैं ।"
मेरा मन आभार से भर गया ।
Friday, 8 June 2018
आगे बढना जिन्दगी
आगे बढना जिन्दगी
प्रकृति ने हमारे
शरीर का ढांचा इस प्रकार बनाया है कि वह हमेशा आगे बढ़ने के लिए हमें प्रेरित करता
है ,और हमें आगे बढ़ने के लिए ही प्रेरित करता है| हमारे पैर वह आगे की ओर बने हुए हैं हमारी बाहें है जो आगे पड़ी हुई चीज को उठाने में सक्षम है| इसी प्रकार हमारी आंखें वह भी आगे देखने के लिए लालायित रहती हैं | तो जीवन का जो यह ढांचा प्रकृति ने हमें दिया है या उस परम शक्ति ईश्वर ने हमें दिया है उसमें आगे बढ़ने का भेद
छुपा हुआ है|
आगे बढ़ना ही
मनुष्य के जन्म की नियति है तो हम क्यों पीछे लौटे ??
हम क्यों पीछे की ओर देखें ??
और हम क्यों अतीत में जीकर अपने मन को प्रभावित
करें ??
अतीत में देखना बुरा नहीं होता लेकिन अतीत की दुखद
घटनाओं को बार-बार याद करना हमेशा ही दुखद होता है| हाँ
अतीत की सुखद घटनाओं को याद करना ज्यादा अच्छा है क्योंकि वह हमें प्रोत्साहन देती
हैं | हमें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं | हमारे मन मस्तिष्क को प्रसन्नचित विचारों से भर देती हैं|
भारतीय पौराणिक ग्रंथों में एक कथा है भगवान शिव
की | कहते हैं कि जब भगवान शिव और सती जो उनकी पत्नी थी | आपस में वे दोनों बहुत
प्रेम करते थे | लेकिन कुछ कारणों की वजह से सती अपने
पिता से नाराज हो गई और उन्होंने यज्ञ की अग्नि में कूद कर आत्मदाह कर लिया| इस घटना से भगवान शिव बहुत क्रोधित हुए और सती की मृत्यु की खबर सुनकर
एक गहरे वैराग्य में डूब गये | उन्होंने सती के
जले हुए शरीर को अपने कंधे पर उठा लिया | वह पूरी सृष्टि के चक्कर लगाने लगे क्योंकि भगवान शिव संसार
के ऐसे देवता हैं जो सृष्टि को चलाने में और सृष्टि का नियंत्रण मैनेज करने में
बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं | तो सभी देवताओं को यह चिंता हुई कि अगर
भगवान शिव को इस वैराग्य या निराशा से मुक्त ना किया गया तो सृष्टि का सारा काम रुक जाएगा |तो कहते हैं कि भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन
चक्र से सती के सभी जले हुए अंगों को एक-एक करके अलग कर दिया | भगवान शिव को उस शव से मुक्त कर दिया | इस प्रकार भगवान शिव
दोबारा अपने वास्तविक कार्य पर लौट आए और अपने दुख को त्याग कर संसार और मनुष्य की
भलाई के कामों में लग गए |अब आप इस कथा की प्रतीकात्मकता देखिए | मनुष्य का जीवन क्या है ?हमारे जीवन की जो दुखद
घटनाएं हैं जब हम उन्हें लगातार अपने जीवन में अपने कंधों पर ढोते रहते हैं ,उठाए रहते हैं या
उनके बारे में बार बार बातें करके स्वयं को और दुसरे को दुःख देते है ,तो हमारा जीवन कठिन
हो जाता है | हमारा जीवन दुखद हो जाता
है | तो क्या हमें भी बीत गए दुखों या बीत गई
दुखद घटनाओं के शवों को अपने कंधों से उतारने की जरूरत नही है |
हमें नई आशाओं के साथ नई उमंगों के साथ नए सपनों के साथ आगे बढ़ना होगा |हमें धरती पर ईश्वर ने उत्सव
के लिए भेजा है| आप सोचिये कि आपकी चेतना को ही
मनुष्य होने के लिए क्यों चुना गया ? किसी और जीव या प्रजाति के रूप में धरती पर
क्यों नहीं भेजा ???
हमें ईश्वर ने एक खास प्रयोजन के
लिए इस धरती पर भेजा है और वह भी मनुष्य जीवन देकर ताकि हम जीवन में नई चुनौतियों
का सामना करें |नए अविष्कार करें| नई संभावनाएं खोजें | इस धरती को और भी सुंदर
बनाएं | अपने जीवन को
सुंदर बनाएं |अपने समाज को सुंदर बनाए| और यही हुआ है आप देखिए जब से
मनुष्य का धरती पर अवतरण हुआ है तब से लेकर आज तक धरती बहुत सारी नए आविष्कारों ,बहुत सारी नई खोजों, बहुत सारी नई
विचारधाराओं को जन्म दे चुकी है | और इसी का परिणाम है कि आज हमारे बीच जो सुख सुविधाएं हैं ,आज हमारे बीच जो
उपलब्धियां हैं ,आज हमारे बीच जो नए-नए संसाधन सामने आ रहे हैं, उनके पीछे एक बड़ा कारण है, मनुष्य की सकारात्मक सोच
|मनुष्य की
विकासवादी सोच | जहाँ ये सोच प्रभावित हुई अवसाद ,कुंठा और ईर्ष्या से वहीँ युद्ध ,हिंसा और
विध्न्स पैदा हुआ ,क्योकि मनुष्य का जन्म प्रसन्नता और निर्माण के लिए हुआ है न कि
तबाही के लिए | सच मानिए जब भी उसने अपने इस स्वभाव से उल्टा काम किया ,संकट पैदा
हुए |
जंगल में अगर आप चले जाएं तो वहां
पर ऐसा विकास आपको नहीं दिखेगा | वहन कोई भी बदलाव नहीं होता वहां की व्यवस्था जैसी
थी वैसी ही है और उनके लिए प्रकृति का यही नियम है कि वे अपने जीवन में प्राक्रतिक
रूप में ही रहें | वहां पर भी एक जीवन है जो सदियों से वैसे ही चला रहा है जैसा वह है क्योंकि
उनका जो ढांचा है उसी प्रकार विकसित है | उन्हें वैसा ही होने के लिए डिज़ाइन
किया गया है |
हरीश
Wednesday, 6 June 2018
विचारों को सयंमित करे ,जीवन अपने आप सुखद हो जायेगा |
मुझे झूठ बोलने से
डर लगता है ।वास्तव में होता क्या है ?यहां अक्सर ऐसा ही होता है कि अगर मैं झूठ भी बोल
दूं तो वह सच हो जाता है ।ऐसा एक बार नहीं पिछले तकरीबन 5 साल से
ऐसा मेरे साथ हो रहा है और मैंने झूठ बोलने से बचने के बहुत प्रयास किए हैं |
अक्सर जीवन में ऐसा
नहीं होता कि हम हर बार सच बोलते हैं | ये भी एक तथ्य है कि
जीवन में हर समय हर किसी के साथ सच बोलना कोई आसन काम नहीं है | कोई नाराज न हो या
किसी को कोई दुःख न पहुचे या फिर किसी को हौसला देने के लिए कई बार आपको झूठ का
सहारा लेना ही पड़ता है | प्रेम संबंधो में ,विवाह संबंधों में या फिर अपने आफिस या
बिजनिस के कामों में सब कुछ ठीक रखने के लिए आपको झूठ भी बोलने पड़ते है | इस सच से
इनकार करना मुश्किल है और हम में से शायद कोई इस बात से अछूता रह पाया हो |
ईमानदारी से अपने आपसे ये बात पूछ कर देखिये क्योकि अपने आप को शायद हमसे बेहतर
कौन जान सकता है ?
कोई बहाना या किसी के साथ जाने से बचने के लिए या
कोई ना कोई इनकार करने के लिए हमें झूठ बोलना ही पड़ता है ,तो ऐसी अवस्थाओं
में मेरे साथ अक्सर ऐसा हुआ है कि जब मैं झूठ बोलता हूं तो सच हो जाता है वैसे ही
हो जाता है मान लीजिए कि मेरे दोस्त ने कहा कि क्या तुम घर में हो?, तो मैं कहता हूं नहीं मैं बाहर हूं ,और पूछता कि तुम
कहां हो तो मैं किसी शहर का नाम ले देता हूं, बाद में होता क्या
है कि मुझे गाहे-बगाहे उस शहर की ओर जाना पड़ता है |कोई ना कोई कारण बन
जाता है तो यह एक प्रकार का भ्रम है या कोई
ऐसा तथ्य कह लीजिए जो जीवन में लगातार पक्का होता जा रहा है |
तो इसको ठीक कैसे
किया जाए??? मैंने यह सोचना शुरू किया कि क्यों ना कुछ ऐसे झूठ
बोले जाएं जिन्हें बोलने से हमें अप्रत्याशित लाभ प्राप्त हो सकें | हमें यह लगता है कि यह होगा नहीं यह जीवन में हो नहीं सकता ,तो क्यों न इस प्रकार के झूठ बोले जाए जैसे कि
मैं बहुत सफल हो रहा हूं
मेरी तरफ बहुत पैसा आ
रहा है
मैं अच्छी सेहत का मालिक हूं
मुझे किसी प्रकार
का कोई रोग नहीं है
मेरे जीवन की सारी आवश्यकताएं पूरी हो रही हैं
परमात्मा की मेरे
ऊपर बड़ी कृपा है
सभी लोग मुझे बहुत
प्यार करते हैं
सभी लोगों के बीच
मेरी बहुत इज्जत है
तो क्यों न इस तरह की बातें
कही जाए क्योकि आपके कथन तो
सच हो रहे हैं ,इस बात पर विशवास करना ही होगा | मेरे मामले में अगर मैं इस तरह की बातें करता हूं तो वाकई देर सवेर चीजे और हालत
सुधर रहे है ,सच हो रहा है आपको बोला हुआ झूठ तो
मुझे लगता है कि झूठ को सकारात्मक ढंग से बोलना चाहिए |
क्यों ना अच्छी चीजें ही कहीं चाहे??
क्यों ना दूसरों के बारे में अच्छी बातें ही
सोची जाएं??
और अपने आप को प्यार किया जाए |अपनी बुराइयों को या अपने को दोष देने के बजाय...
क्यों ना अपनी अच्छाइयों के बारे में बात की जाए
|
जैसे कि मैं बहुत
अच्छा हूं ,
मैं तंदुरुस्त हूं ,
मैं यह काम कर सकता
हूं ,
और इससे अच्छा अगर
आप यह कहे कि मैंने फलां सफलता या चीज प्राप्त कर ली है ,चाहे अभी वास्तव में प्राप्त
नहीं की, लेकिन अपने दिमाग को यह संकेत देना कहीं ना कहीं
आपको एक बड़ा भरोसा देता है कि ,हां यह चीज मेंने पा ली है |यह चीज मेरी जिंदगी में हो गई है| मेरे जीवन बहुत सारी खुशियां आ रही है, और मेरे जीवन में
सारी जरूरतें हैं पूरी हो गई हैं |
आपको किसी आर्थिक
सहायता की जरूरत है या आप किसी समस्या में फंस गए हैं तो अगर आप अपने दिमाग को
लगातार यह संकेत देते हैं कि मैंने अपनी आर्थिक समस्या को दूर कर लिया है और उसे
दूर करने के लिए हर संभव सहायता मुझे मिल चुकी है और इसी
प्रकार की समस्या को लेकर आप यह सोचते हैं कि यह समस्या हल हो गई है घबराने की
जरूरत नहीं है | आपके अंदर एक विश्वास और सुकून पैदा होता है जो आपको समस्या के संभावित हल
की ओर भी ले जाता है |अपने दिमाग को जब आप साकारात्मक संकेत देते हैं तो कहीं ना कहीं आपके
अंदर सकारात्मकता पैदा होती है आपके दिमाग को सुकून मिलता है |उसी तरह की जो
शांति है वह पूरे शरीर में फैल जाती है और आप कहीं ना कहीं एक विश्वास प्राप्त कर
लेते हैं | मुश्किलों को आसान
महसूस करते हैं और जब आप लगातार इन सारी चीजों को सुबह उठ या रात को सोते समय या दिन में आप दोहराते हैं तो
सच मानिए कि यह चीजें आप की ओर अग्रसर होने लग जाती हैं |आप की ओर आने लग
जाती हैं इसे आप अपने जीवन को अपने शरीर को अपने मस्तिष्क को एक चुंबकीय प्रभाव के
अधीन भी कह सकते हैं कि आपका शरीर और मस्तिष्क ऐसा है कि
जैसा हम सोचते हैं वैसा ही जिंदगी में होना शुरू
हो जाता है |
सच मानेंगे कि
विचार जो आपके दिमाग में चलते हैं सारा दिन यहां आप जैसा लोगों के बारे में या
अपने बारे में सोचते हैं वैसी ही अनुभूति और प्रतिक्रियाएं होने लग जाती हैं | मान लीजिये आप कहीं जा रहे हैं ,आपके मस्तिष्क में किसी प्रकार का भय है, यां इस तरह की
तस्वीरें बन रही है कि कोई दुर्घटना ना हो जाए, कोई मेरे साथ
अप्रत्याशित घटना ना हो जाए या मेरी बेइज्जती ना हो जाए या पता नहीं मैं वहां पर
अच्छा प्रदर्शन कर पाऊंगा या नहीं कर पाऊंगा ??इस
तरह की संभावना है जब आप अपने दिमाग में पैदा करते हैं, सोचते हैं, तो कई बार उस तरह की स्थितियां पैदा हो जाती हैं, तो क्यों ना हम इस
तरह के संकेत स्वयम को देना शुरू करें कि जहां भी हम जा रहे हैं ,वहां एक सुखद
यात्रा होगी और सब हंसी खुशी वहां पर पहुंचेंगे और बहुत सी सफलता में प्राप्त होगी, बहुत सारा आदर हमें प्राप्त होगा, और वहां हम एक
प्रसिद्ध वक्ता के तौर पर यां प्रसिद्ध व्यक्ति के तौर पर स्थापित होंगे |
इस तरह हमारे जीवन में एक नई और सुखद प्राप्ति
जो है ,वह और जुड़ जाएगी |मुझे लगता है कि
हमें सोचना चाहिए,
जब हम अच्छा सोचते हैं तो हम अच्छी बातों को
अपनी ओर आकृष्ट करते हैं|
मैं सोचता हूं कि इस मामले में हमें अपने
विचारों को काफी सहजता से सोचना चाहिए या उनके ऊपर कार्य करना चाहिए| हम खाली बैठे हो या कोई काम कर रहे हो या हम सोने से पहले कुछ सोच रहे
हो तो उस समय हमारे विचार सकारात्मक हो ,समस्या के बीच भी हम ये माने कि हमने समस्या हल कर ली
है और सब कुछ सुखद अंत की और बढ़ चला है |
हमारे विचार बहुत स्वस्थ हो |
हमारे विचार बहुत ही रोमांचकारी हो| बहुत ही शांतिमय हो| दूसरों की और अपनी भलाई के लिए प्रकट किए गए हो| चाहे मेरे दिमाग में हो या हमारी
जबान पर ,हम किसी से फोन पर बात भी कर रहे हो, या किसी और आमने सामने बात कर रहे हो ,तो हमें नकारात्मक
बातों से बचना चाहिए और किसी भी प्रकार का कोई मन में जलन या क्या द्वेष ना हो किसी प्रकार की कोई
निराशा दूसरों को
लेकर ना हो या किसी प्रकार की हीन भावना हमारे मन में पैदा ना हो| ये समय ऐसा होता है बहुत से
नकारात्मक विचार और संदेह भी आपके मन में बार आ रहे होते है पर आपको इनसे लड़ने की
बजे अच्छे और सुखद विचारो को भी लगातार अपने मन मस्तिष्क में जिलाए रखना है |
वैसे तो आजकल की
जिंदगी में हर व्यक्ति इस तरह की सोच से बच नहीं पाता है ,वो समाज
में रहता है ,उसे क्रोध भी आता है उसे गुस्सा भी आता है
,उसे लोगों से ईर्ष्या भी होती है| कई बार वह अपनी सफलता को लेकर निराश भी होता है और उसे संघर्ष करना पड़ता है पर एक बात
दूसरी भी है कि अगर हम लगातार इस तरह के अच्छे संकेत अपने दिमाग को दे या अपने आप
को एक आत्मविश्वास से लबरेज रखें कि
हाँ मैंने ये कर लिया है और मै सफल हो गया हूँ तो
हम सफल होंगे और हमें होना ही है और हम हो गए और
हमें सब कुछ मिल गया है| लोग हमें प्यार कर रहे हैं और मैं बहुत
ही प्यारा इंसान हूं| मैं अगर दूसरों को प्यार करता हूं तो वह भी मुझे प्यार कर रहे हैं ,इश्वर मेरे साथ है और मैं सफल हो रहा हूं |
मैं सब कुछ प्राप्त
कर रहा हूं मेरा परिवार मेरे साथ है और मेरे परिवार में मैं दूसरों के साथ बहुत ही
प्यार से पेश आ
रहा हूं तो मुझे लगता है कि इस तरह की बातें आपके जीवन में होना शुरू
हो जाएंगी | आरोग्यता और
प्रसन्नता आपके जीवन का एक जरूरी हिस्सा बन जाएगी |
ये एक तथ्य है जिस प्रकार आप सोचते हैं उस प्रकार की सोच आपके
दिमाग में कहीं ना कहीं आपके अवचेतन में घर कर जाती है | क्योंकि
जिंदगी एक लंबी प्रक्रिया है |बचपन में बहुत सी यादे या घटनाएँ है जो आपकी ज़िंदगी को प्रभावित करते
हैं| कई बार वह अच्छे कारण भी हो सकते हैं और बुरे
कारण भी हो सकते हैं | लेकिन हम अपने बुरे वक्त को या बुरी यादों को बार-बार दोहराते रहे, बार-बार याद करते रहे तो उससे समस्या का हल नहीं होता है बल्कि समस्या
और भी गंभीर हो जाती है,हम कई अनचाहे रोगों का शिकार हो जाते हैं , तो इसको लेकर हमें इस प्रकार का उपक्रम करना चाहिए या इस प्रकार का उपाय करना चाहिए कि हम उन बातों को भूलकर अच्छी यादों को या
अच्छी घटनाओं को याद करे |
जैसे कई बार क्या
होता है कि जब हम बहुत ही मुसीबत में हो या किसी बात को लेकर बहुत परेशान हो तो
इसके ऊपर एक जादुई प्रयोग यह है कि आप उस समय ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति को याद
करें ,जिसने आपको यां आपने जिसे बहुत ज्यादा प्यार किया हो | जो आपके जीवन में बहुत ही ज्यादा आपको अच्छा लगता हो| आप उसे याद करें |उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा याद करें तो आप
बहुत ही ज्यादा हल्का महसूस करेंगे और
आपको बहुत ही शांति महसूस होगी| आपके मन में जब इस प्रकार की शांति फैलती
है तो वह समस्या के हल के लिए सुझाव भी अपने आप आपकी तरफ आना शुरू हो जाते हैं | याद कीजिये आर्केमीडीज के
‘यूरेका ‘ को | उसने भी स्वयं को एक पानी के टब में विचार हीन छोड़ दिया था कि तभी
सही उत्तर का संकेत उसे मिल गया |कोई
ना कोई उपाय दिमाग ढूंढना शुरू कर देते
हैं ,जब आप विचारों से
लड़ना छोड़ देते है ,बीएस उन्हें होने देते हैं | आपका दिमाग जो है वह एक अच्छा काम करता है और अपने आप आपको आपके ही द्वारा समझे अर्जित किये गए संकेतों में
से निकलकर अच्छे संकेत देता है |
इसलिए अपने विचारों को संयमित करना अपने विचारों
को या सोच को सकारात्मक करना, अपने विचारों को
अच्छे विचारों से भर लेना, यह एक सुंदर जीवन जीने की कला है | सुबह उठकर या दोपहर में या शाम को हमें इस तरह की घटनाओं को या लोगों को
या बातों को सुनना जानना पढ़ना चाहिए जो हमें सकारात्मक सोच के लिए अग्रसर करें| जो नकारात्मक चीजें हैं छोड़ दीजिए | जानने का अर्थ क्या है ? यही है कि हमें यह जानना है कि हमें कौन सी ऐसी
चीज है जिन को हमें छोड़ना है | तो अपने आप हमें वह चीजें प्राप्त हो
जाएगी जो हमें प्राप्त करना है| जीवन एक ऐसी परीक्षा है जहाँ सभी सवाल हल करने की
जरूरत नहीं क्योकि नेगेटिव मार्किंग की व्यवस्था भी है | तो सभी सवाल हल करने के
चक्कर में सही भी गलत हो जाते है | जब जीवन थोड़े सवालों के हल से ही सही हो सकता
है ,सफलता प्राप्त कर सकता है तो हम क्यों अपना धैर्य खोएं | हम ज्यादातर
ऐसी चीजों को पकड़ रखते हैं ,ऐसी चीजों पर उलझे रहते हैं जो हमें दुखी
करती हैं| हमें परेशान करती हैं, तो हमें उन चीजों को छोड़ देना चाहिए| हमें हर संभव कोशिश करनी चाहिए जीवन में अच्छी चीजों को पकड़ने की |कोशिश करेंगे तो जरुर सफल होंगे | जीवन लगातार प्रयोगों पर ही आधारित है तो क्यों न
प्रयोग किए जाएं| एक ही ढर्रे पर जीवन को घसीटते रहने का क्या लाभ ?? जीवन को अच्छे दोस्त दिए जाएं, अच्छे विचार दिए
जाएं, अच्छी किताबें दी जाएं ,अच्छे विचार या अच्छे
वक्ता दिए जाएं| हम अच्छा संगीत सुनें| जरूरी नहीं है कि हमारे पास अवसाद का
संगीत ही सुनने के लिए हो| चाहे हम सड़क जा
रहे हैं ,टीवी देख रहे हैं तो बहुत कुछ है जो देखने लायक नहीं
होता है | जिसे देखने से
आपका मन विचलित होता हैआप उग्रता की और बढ़ते है तो इसे छोड़
दें,चैनल बदल दें |
इसके लिए सबसे
जरूरी काम है अपने जीवन के प्रति अपने शरीर के स्वास्थ्य के प्रति और जो भी आपके
पास है उसके प्रति ,आभारी होना| धन्यवादी होना| भविष्य में आपको क्या मिलेगा या नहीं मिलेगा ,आगे की बात है
लेकिन वर्तमान में जो आपके पास है ,चाहे आपके पास आपका शरीर पूरा सवस्थ अवस्था में आपके पास
है| आप रोग हीन है तो यह भी आपकी उपलब्धि है आपका सबसे अनमोल
खजाना है |किसी प्रकार का
आपको कोई लाभ हो रहा है, आपको कोई अच्छे दोस्त मिल रहे हैं ,कोई अच्छी सलाह मिल रही है यह भी आपके लिए एक प्रप्ति
है ,एक सफल प्राप्ति |तो इसे आप को त्यागना नहीं चाहिए| इसके लिए आभारी होना चाहिए| धन्यवाद देना चाहिए|
चीजों की आलोचना करने की बजाय हमेशा दूसरों की
अच्छाई को बताने में ज्यादा रुचि लेनी चाहिए |इस प्रकार हमारा
जीवन जो है वह बड़ा सफल होगा मन बड़ा हल्का होगा और दिमाग में शांति भरी होगी| प्रसन्नता महसूस होगी
क्योंकि मुस्कुराने के लिए कोई ज्यादा आपको बल नहीं लगाना पड़ता |आप मुस्कुराइए, दूसरे को देख कर मुस्कुराए| उन्हें धन्यवाद
कहिए ,प्रशंसा के दो शब्द
कहिये | गर्मजोशी से हाथ में मिलाइये | आसान सी चीजें हैं जो आप बड़ी आसानी से कर सकते हैं |एक दूसरे को आदर देना, एक दूसरे की बात को सुनने की कोशिश करना
और एक-दूसरे से हंसते मुस्कुराते हुए मिलना | बस इतना सा ही करना है आपको | अपने काम को पूरी
प्रसन्नता से करिए उसे इन्जाय कीजिये |
आप सोचिए कि सुबह से लेकर शाम तक जहाँ गए ,जहां आप बैठे , चाहे आप स्टेशन पर गए चाहे आप बस
स्टैंड पर गए, आप दफ्तर में गए यां आप ट्रैफिक में फंसे हुए थे तो आपने किस प्रकार
ट्रैफिक को पार किया| किस प्रकार दिमाग में शांति बनाए रखी और किस प्रकार रेलवे क्रॉसिंग के
ऊपर लगे हुए जाम में आपने आप अपने आप को नियंत्रित रखा| खुशनुमा रखा ,अच्छे संगीत को सुनते रहे,गुनगुनाते रहे , अच्छे लोगों को
देखते रहे |लोगों की तरफ देखकर आपने मुस्कुराते हुए उनका अभिवादन किया ..... तो यह बड़ी आसान सी चीजें हैं |क्योंकि
हम जो देते हैं हमें वही प्राप्त होता है|
दुनिया में बहुत सारे लोग हैं जो नकारात्मकता से
भरे हुए हैं लेकिन मेरा अनुभव यह रहा है कि अगर हम नकारात्मक लोगों को भी हंसी
खुशी मिले और उनका धन्यवाद करते रहे |उनकी प्रशंसा कर दे, एक बार तो उनके ऊपर बहुत ही सकारात्मक प्रभाव पड़ता है | अगले दिन से ही वह आपका भी धन्यवाद करना शुरू कर
देते हैं आपकी तरफ नरम होना शुरू कर देते हैं और आपके साथ अच्छा व्यवहार करते हैं
।
Subscribe to:
Comments (Atom)